जयपुर। राजस्थान के प्रशासनिक हलकों में हाल ही में हुए बड़े फेरबदल के तहत आईएएस अधिकारी डॉ. नीरज के. पवन को खेल विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर इंदिरा गांधी पंचायतीराज संस्थान (IGPRS) का महानिदेशक बनाया गया है। 2003 बैच के राजस्थान कैडर के आईएएस अधिकारी नीरज के. पवन की गिनती प्रदेश के सबसे चर्चित, लोकप्रिय और विवादित अधिकारियों में होती है। आइए जानते हैं उनके फर्श से अर्श तक पहुंचने और फिर विवादों में घिरने की पूरी कहानी।
प्रारंभिक जीवन और शिक्षा: ठेठ हिंदी मीडियम का छात्र
डॉ. नीरज के. पवन मूल रूप से राजस्थान के झालावाड़ जिले के रहने वाले हैं। उनके पिता पुलिस विभाग में थे और माता एक शिक्षिका थीं। नीरज की पूरी शुरुआती शिक्षा गांव के शुद्ध सरकारी स्कूलों में हिंदी माध्यम से हुई। उन्होंने विज्ञान (B.Sc.) के बाद क्लीनिकल साइकोलॉजी में गहरी रुचि दिखाई और इसी विषय में एमएससी (M.Sc.), एमफिल (M.Phil) और बाद में पीएचडी (Ph.D) तक की शिक्षा हासिल की। हिंदी मीडियम से होने के बावजूद उन्होंने पहले ही प्रयास में सिविल सेवा परीक्षा (UPSC) पास कर ली और 2003 में आईएएस बने।
प्रशासनिक करियर: जब कहलाए ‘सुपर IAS’
नीरज के. पवन ने अपने करियर की शुरुआत उपखंड अधिकारी (SDM) के रूप में की और जल्द ही अपनी खास कार्यशैली के लिए मशहूर हो गए। उन्होंने कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया:
- कलेक्टर के रूप में: वे डूंगरपुर (2007-09), करौली (2009-10), पाली (2010-12) और भरतपुर (2013) जैसे जिलों के जिला मजिस्ट्रेट (DM) रहे।
- अन्य महत्वपूर्ण पद: उन्होंने राजस्थान हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन, स्वास्थ्य विभाग (NRHM) में निदेशक, कृषि विभाग, श्रम विभाग सचिव और बीकानेर व बांसवाड़ा के संभागीय आयुक्त के रूप में भी सेवाएं दी हैं।
लोकप्रियता के किस्से: आम आदमी का अफसर
नीरज के. पवन की लोकप्रियता का आलम यह था कि वे आम जनता के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते थे। उनके बारे में कुछ किस्से बहुत मशहूर हैं:
- भरतपुर ट्रांसफर का विरोध: जब भरतपुर से उनका तबादला हुआ, तो स्थानीय लोगों ने इसका इतना विरोध किया कि पूरा बाजार बंद करवा दिया गया था। सोशल मीडिया पर उनके ‘फैन क्लब’ चलते थे।
- घायलों की बचाई जान: अक्टूबर 2015 में, जब वे एनआरएचएम (NRHM) के उपनिदेशक थे, उन्होंने भरतपुर में एक सड़क दुर्घटना में घायल दो लोगों को अपनी गाड़ी में डालकर गुमनाम रूप से अस्पताल पहुंचाया और उनकी जान बचाई थी।
- गुर्जर आंदोलन: राजस्थान में उग्र गुर्जर आरक्षण आंदोलन को शांत करने और मध्यस्थता कराने में उनकी बेहद खास भूमिका रही थी, जिसके बाद वे सरकार के चहेते अफसरों में गिने जाने लगे।
विवाद और करियर का ‘डार्क फेज’ (NRHM घोटाला) करियर के पीक पर नीरज के. पवन का नाम बड़े विवादों में भी घिरा।
- वर्ष 2016 में, राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (NRHM) में परियोजना निदेशक रहते हुए उन पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे।
- राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) ने एक दलाल और कुछ अधिकारियों के साथ नीरज के. पवन को भी गिरफ्तार किया था।
- इस मामले में उन्हें कई महीनों तक जेल में रहना पड़ा और करीब दो साल तक वे ‘एपीओ’ (Awaiting Posting Orders) यानी बिना पद के रहे।
- हाल ही में फरवरी 2024 में, केंद्र सरकार ने इस 6 साल पुराने मामले में उन पर मुकदमा चलाने की आधिकारिक अनुमति दे दी है, जिससे उनकी कानूनी मुश्किलें फिर से बढ़ सकती हैं।
वर्तमान स्थिति
तमाम उतार-चढ़ाव, जेल और जांच के बावजूद, नीरज के. पवन ने सिस्टम में अपनी वापसी की और कांग्रेस व भाजपा, दोनों ही सरकारों में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। अब उन्हें IGPRS के महानिदेशक जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। उनकी यात्रा दिखाती है कि एक अधिकारी का जीवन कितनी संभावनाओं, उपलब्धियों और चुनौतियों से भरा हो सकता है।
वर्तमान में डॉ. नीरज के. पवन महानिदेशक, इंदिरा गांधी पंचायती राज संस्थान (IGPRS), जयपुर के पद पर पदस्थापित हैं।
हाल ही में (19 मार्च 2026 को) राजस्थान सरकार द्वारा किए गए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में उन्हें खेल एवं युवा मामले विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर इस नए पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
