जयपुर, राजस्थान के राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने सोमवार को जयपुर के एक निजी होटल में आयोजित ‘ग्राम संसद’ कार्यक्रम में प्रदेश भर से आए सरपंचों के साथ संवाद किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सरपंच केवल गाँव के प्रतिनिधि ही नहीं, बल्कि भारत के समग्र विकास के संवाहक हैं।
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सरपंच संवाद के प्रमुख बिंदु
राज्यपाल ने अपने संबोधन में सरपंचों को गाँव के विकास के प्रति संवेदनशील और सुनियोजित होने का आह्वान किया। उनके भाषण के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:
1. शिक्षा और बच्चों का भविष्य
- राज्यपाल ने सरपंचों से गांवों के विद्यालयों और सार्वजनिक भवनों की स्थिति पर निरंतर निगरानी रखने को कहा।
- उन्होंने प्राथमिक शिक्षा को बौद्धिक क्षमता निर्माण की नींव बताया और सरपंचों से बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान देने का आग्रह किया।
- बच्चों में आत्मविश्वास जगाने और उन्हें सिविल सेवाओं (UPSC/RPSC) जैसी उच्च परीक्षाओं के लिए शुरुआत से ही मानसिक रूप से तैयार करने पर जोर दिया।
2. जल, विद्युत और जनकल्याण
- सरपंचों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया कि जल और विद्युत की सर्वसुलभता हर ग्रामीण तक पहुँचे।
- उन्होंने “हर घर जल” योजना की सराहना करते हुए इसे ग्रामीण सशक्तिकरण की ऐतिहासिक पहल बताया।
- यह सुनिश्चित करने को कहा कि योजनाओं का लाभ वास्तविक रूप से वंचित और पिछड़े वर्गों को मिले।
3. गौ-नंदी संरक्षण और पर्यावरण
- राजस्थान की गौपालन परंपरा का जिक्र करते हुए राज्यपाल ने अब ‘नंदी संरक्षण’ के लिए भी सक्रियता से कार्य करने का आह्वान किया।
- उन्होंने राजसमंद की पिपलांत्री पंचायत का उदाहरण दिया, जहाँ बच्चियों के जन्म पर पेड़ लगाने और 1 करोड़ पेड़ लगाने का कीर्तिमान स्थापित किया गया है।
4. ऐतिहासिक गौरव और पंचायत राज
- राज्यपाल ने गौरव के साथ याद दिलाया कि देश की पहली पंचायत राज व्यवस्था राजस्थान के नागौर जिले से प्रारंभ हुई थी।
- उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भैरोंसिंह शेखावत द्वारा गांवों के विकास के लिए की गई पहलों की भी सराहना की।
आंकड़ों में ग्रामीण भारत
राज्यपाल ने बताया कि वर्तमान में भारत में कुल 2,55,000 ग्राम पंचायतें हैं, जिनमें से 11,266 राजस्थान में हैं। उन्होंने कहा कि जब इन सभी पंचायतों का विकास हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बनेगा, तभी भारत तेजी से विकास पथ पर आगे बढ़ सकेगा।
