केंद्र सरकार ने सरकारी परियोजनाओं के टेंडर में शामिल होने वाली कंपनियों के लिए व्यापार को आसान बनाने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम उठाया। केंद्रीय विद्युत मंत्रालय ने अब बैंक गारंटी (BG) के विकल्प के तौर पर ‘इंश्योरेंस श्योरिटी बॉन्ड’ (ISB) को मंजूरी दे दी। इस फैसले से विशेष रूप से ऊर्जा और बुनियादी ढांचा क्षेत्र में काम करने वाली कंपनियों को बड़ी वित्तीय राहत मिलेगी।
क्या है नया बदलाव?
अब तक कंपनियों को सरकारी टेंडर प्रक्रिया में हिस्सा लेने के लिए भारी-भरकम राशि की ‘बैंक गारंटी’ जमा करनी पड़ती थी। नए आदेश के बाद, कंपनियां अब ‘बिड’ और ‘परफॉर्मेंस सिक्योरिटी’ के तौर पर ISB का उपयोग कर सकेंगी। वित्त मंत्रालय ने इसके लिए ‘जनरल फाइनेंस रूल्स’ में आवश्यक संशोधन कर दिए।
कंपनियों को क्या होगा फायदा?
राजस्थान सोलर एसोसिएशन के अध्यक्ष सुनील बंसल ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसके मुख्य लाभ गिनाए :
- वर्किंग कैपिटल: बैंक गारंटी लेने से कंपनियों की बैंक क्रेडिट लिमिट ब्लॉक हो जाती थी, जिससे उनके पास वर्किंग कैपिटल की कमी हो जाती थी। अब क्रेडिट लिमिट फ्री रहेगी।
- MSME को संबल: ऊर्जा क्षेत्र में काम करने वाली छोटी और मध्यम इकाइयों (MSME) को इससे सबसे ज्यादा वित्तीय लाभ होगा।
- स्वस्थ प्रतिस्पर्धा: वित्तीय बाधाएं कम होने से अब ज्यादा कंपनियां टेंडर प्रक्रिया में भाग ले सकेंगी, जिससे टेंडरों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी। स्वस्थ प्रतिस्पर्धा बढ़ने से अंततः परियोजनाओं की लागत में भी कमी आएगी।
इन क्षेत्रों में तुरंत होगा लागू
विद्युत मंत्रालय ने राज्य सरकारों को अपनी निविदाओं में ISB को शामिल करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। हालांकि अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy) में यह विकल्प पहले से था, लेकिन अब इसे डिस्कॉम (Discoms) की विद्युत खरीद, बैटरी ऊर्जा भंडारण प्रणाली (BESS) परियोजनाओं में भी पूरी तरह लागू कर दिया गया है।
सरकार का यह कदम ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की रफ्तार बढ़ेगी और कंपनियों की नकदी की समस्या दूर होगी।
