डिजिटल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्सपोज़ नाउ’ द्वारा जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग (PHED) के ठेकेदारों के लंबित भुगतान और उनकी दयनीय स्थिति को लेकर चलाए गए विशेष अभियान के बाद अब प्रदेश भर के ठेकेदारों ने एकजुट होकर अपनी आवाज़ बुलंद की है। ‘एक्सपोज़ नाउ’ की रिपोर्ट के बाद, ऑल राजस्थान कॉन्ट्रैक्टर एसोसिएशन (ARCA) ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर जल जीवन मिशन (JJM) से जुड़ी जटिलताओं को दूर करने की मांग की है।
ठेकेदारों की पीड़ा: “सुनो सरकार, हमारे भी हैं घर-बार”
‘एक्सपोज़ नाउ’ ने “सुनो सरकार, हमारे भी हैं घर-बार” शीर्षक के साथ ठेकेदारों की आर्थिक तंगी और 2 साल से अटके भुगतानों के मुद्दे को पुरजोर तरीके से उठाया था। इसके बाद प्रदेश भर के ठेकेदारों ने अपनी समस्याओं को साझा किया, जिसमें मुख्य रूप से निम्नलिखित बिंदु सामने आए हैं:-
- लंबित भुगतान और फाइनल बिल: पिछले 2-3 वर्षों से कार्यों के रनिंग बिल और कार्य पूर्ण होने के बावजूद फाइनल बिल अटके हुए हैं।
- अनुचित एलडी और पेनल्टी: विभाग द्वारा समय पर भुगतान न करने के बावजूद ठेकेदारों पर ‘लिक्विडेटेड डैमेज’ (LD) और भारी पेनल्टी थोपी जा रही है, जिसे ठेकेदार संघ ने सरासर अन्यायपूर्ण बताया है।
- ब्याज का भारी बोझ: भुगतान में देरी के कारण ठेकेदारों को बाजार और बैंकों से भारी ब्याज पर कर्ज लेना पड़ा है, जिससे उनका मुनाफा खत्म हो गया है और वे कर्ज के जाल में फंस गए हैं。
मुख्यमंत्री को सौंपे गए सात प्रमुख सुझाव
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष नरेंद्र सोलंकी ने मुख्यमंत्री को भेजे पत्र में सात सूत्रीय मांग पत्र सौंपा है, ताकि जल जीवन मिशन की गति बनी रहे:-
- जेजेएम के अंतर्गत सभी लंबित बिलों का तुरंत एकमुश्त भुगतान सुनिश्चित हो।
- पूर्ण हो चुके कार्यों के फाइनल बिल और O&M (रखरखाव) का भुगतान तत्काल जारी किया जाए।
- विभागीय देरी के कारण ठेकेदारों पर लगाई गई एलडी और पेनल्टी को पूर्णतः निरस्त किया जाए।
- सभी चालू कार्यों के लिए बिना एलडी के कम से कम 1 वर्ष का समय विस्तार (Time Extension) दिया जाए।
- जीएसटी दर में वृद्धि के कारण उत्पन्न GST डिफरेंस राशि का भुगतान हो।
- भुगतान प्रक्रिया के लिए स्पष्ट और पारदर्शी गाइडलाइन जारी की जाए।
- भविष्य में एग्रीमेंट की शर्तों के अनुसार नियमित भुगतान की व्यवस्था की जाए।
सकारात्मक बदलाव की उम्मीद
ठेकेदार संघ का मानना है कि प्रधानमंत्री के इस ‘ड्रीम प्रोजेक्ट’ को सफल बनाने के लिए ठेकेदारों की आर्थिक स्थिरता अनिवार्य है। ‘एक्सपोज़ नाउ’ के हस्तक्षेप के बाद अब विभाग और सरकार स्तर पर हलचल शुरू हो गई है। उम्मीद है कि मुख्यमंत्री इस गंभीर विषय पर संज्ञान लेते हुए जल्द ही प्रदेश के हजारों ठेकेदारों और उनसे जुड़े परिवारों को राहत प्रदान करेंगे।
