बेटियों की बोली रोकने के लिए सूचना आयोग का बड़ा कदम: ‘नाता प्रथा’ पर केंद्र से मांगी रिपोर्ट, कहा— ‘जनहित में सार्वजनिक करें पूरी कार्रवाई’
विशेष संवाददाता
देश के कुछ हिस्सों में ‘नाता प्रथा’ के नाम पर बेटियों के सम्मान के साथ हो रहे खिलवाड़ को रोकने के लिए केंद्रीय सूचना आयोग (CIC) ने अब आर-पार की लड़ाई का मन बना लिया है। आयोग ने एक ऐतिहासिक फैसले में महिला एवं बाल विकास मंत्रालय को सख्त निर्देश दिया है कि इस कुप्रथा के खिलाफ अब तक की गई कार्रवाई की रिपोर्ट (ATR) को सार्वजनिक किया जाए।
कुप्रथा की आड़ में ‘मानव तस्करी’: क्या है पूरा मामला?
कभी विधवाओं और परित्यक्ता महिलाओं के पुनर्विवाह के लिए बनी ‘नाता प्रथा’ आज एक घिनौने कारोबार में तब्दील हो चुकी है। राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे राज्यों में इस प्रथा के नाम पर महिलाओं और नाबालिग लड़कियों की सरेआम खरीद-फरोख्त हो रही है।
हैरान करने वाली कड़वी सच्चाई: * बेटियों की कीमत: बाजार की तरह लड़कियों का सौदा 50,000 रुपये से लेकर 3 लाख रुपये तक में किया जा रहा है।
अपनों ने ही बेचा: सुनवाई के दौरान एक झकझोर देने वाला मामला सामने आया, जहाँ एक पिता ने अपनी ही नाबालिग बेटी को महज ढाई लाख रुपये के लिए ‘नाता प्रथा’ की भेंट चढ़ा दिया।
सूचना आयोग का ‘हंटर’: जनहित सर्वोपरि सूचना आयुक्त उदय माहुरकर ने आरटीआई के तहत सुनवाई करते हुए स्पष्ट किया कि भले ही व्यक्तिगत जानकारी साझा न की जाए, लेकिन इस कुप्रथा पर सरकार क्या कदम उठा रही है, यह जानना जनता का अधिकार है। आयोग ने मंत्रालय को आदेश दिया है कि राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) को सौंपी गई ‘कार्रवाई रिपोर्ट’ को सार्वजनिक पटल पर रखा जाए।
“यह केवल परंपरा नहीं, बल्कि समाज के माथे पर कलंक है। इसे रोकना और इसकी सच्चाई सामने लाना ‘जनहित’ का विषय है।” — केंद्रीय सूचना आयोग
NHRC की सिफारिश: सख्त कानून और पॉक्सो की कार्रवाई राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने पहले ही इस पर चिंता जताते हुए विशेष कानून बनाने की वकालत की है। आयोग का कहना है कि:
ऐसे समझौतों के लिए मजबूर करने वालों पर ‘मानव तस्करी’ (Human Trafficking) की धाराओं में केस दर्ज हो।
नाबालिगों से जुड़े मामलों में पॉक्सो (POCSO) कानून के तहत बिना किसी ढिलाई के सख्त एक्शन लिया जाए।
Expose Now की राय: परंपरा के नाम पर बेटियों की नीलामी सभ्य समाज के लिए शर्मनाक है। केंद्रीय सूचना आयोग का यह कड़ा रुख उन बिचौलियों और अपराधियों के लिए चेतावनी है जो मासूमों के भविष्य का सौदा करते हैं। अब समय आ गया है कि रिपोर्ट केवल फाइलों में न रहे, बल्कि जमीन पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई के रूप में दिखे।
