AI-Ready बनेंगे भारत के बच्चे! सीबीएसई सत्र 2026-27 से क्लास 3-8 तक शुरू करेगा ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ की पढ़ाई

भारत की स्कूली शिक्षा अब भविष्य की जरूरतों के मुताबिक और भी अधिक आधुनिक होने जा रही है। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 3 से 8 तक के छात्रों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) का नया पाठ्यक्रम शुरू करने की घोषणा की है।

केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने 1 अप्रैल 2026 को इस नए करिकुलम फ्रेमवर्क को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। यह ऐतिहासिक कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क फॉर स्कूल एजुकेशन (NCF SE) 2023 के उद्देश्यों को पूरा करने की दिशा में उठाया गया है।

पाठ्यक्रम की मुख्य बातें: क्या सीखेंगे छात्र?

सीबीएसई ने स्पष्ट किया है कि यह पाठ्यक्रम बच्चों को सिर्फ गैजेट्स का उपयोग करना नहीं सिखाएगा, बल्कि उन्हें तकनीकी रूप से दक्ष बनाएगा:

  • प्राथमिक स्तर (कक्षा 3-5): यहाँ बच्चों को कहानियों, खेल और गतिविधियों के जरिए लॉजिकल रीजनिंग, प्रॉब्लम-सॉल्विंग, पैटर्न रिकग्निशन और बुनियादी कोडिंग की समझ दी जाएगी।
  • मिडिल स्तर (कक्षा 6-8): इस स्तर पर छात्र AI की बारीकियां सीखेंगे—जैसे मशीन लर्निंग, डेटा का उपयोग, डिजिटल सुरक्षा और टेक्नोलॉजी का नैतिक (Ethical) इस्तेमाल। इसके लिए प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट्स और इंटरैक्टिव सेशन्स आयोजित किए जाएंगे।

क्यों जरूरी है यह बदलाव?

शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस पहल से बच्चों में क्रिटिकल थिंकिंग पैदा होगी। वे न केवल भविष्य की टेक्नोलॉजी को बेहतर समझेंगे, बल्कि इंटरनेट पर फैलने वाली अफवाहों और साइबर खतरों से बचने के प्रति भी जागरूक होंगे।

सीबीएसई इससे पहले कक्षा 6 से 15 घंटे का इंट्रोडक्टरी मॉड्यूल और कक्षा 9-12 में AI को वैकल्पिक विषय के रूप में पढ़ा रहा था। अब इसे प्राइमरी लेवल से ही पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने से देशभर के स्कूलों में एकरूपता आएगी।

शिक्षकों को दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग

इस बड़े बदलाव को प्रभावी ढंग से लागू करने के लिए सीबीएसई ने सभी संबद्ध स्कूलों को निर्देश जारी कर दिए हैं। बोर्ड बड़े स्तर पर शिक्षकों के लिए विशेष ट्रेनिंग प्रोग्राम भी आयोजित करेगा। हालांकि आंध्र प्रदेश, दिल्ली और तमिलनाडु जैसे राज्य पहले से ही अपने स्तर पर AI शिक्षा पर काम कर रहे हैं, लेकिन सीबीएसई के इस कदम से इसे राष्ट्रीय स्तर पर मजबूती मिलेगी।

“यह फ्रेमवर्क भारत को ग्लोबल AI क्रांति में अग्रणी बनाने की दिशा में एक बड़ा मील का पत्थर साबित होगा।” — शिक्षा विभाग के अधिकारी

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