(ब्यूरो रिपोर्ट / बाड़मेर-जयपुर) – बाड़मेर जिले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने बड़ी कार्रवाई करते हुए एक कनिष्ठ सहायक के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया । आरोपी क्लर्क ने एक एएनएम का पांच महीने का अटका वेतन बनाने की एवज में 30 हजार रुपये की रिश्वत मांगी थी । ट्रैप की योजना के दिन आरोपी कार्यालय नहीं आया । बाद में विभाग ने उसे पद से हटा दिया । इसके चलते रंगे हाथों पकड़ने की कार्रवाई पूरी नहीं हो सकी । अब वॉयस रिकॉर्डिंग में रिश्वत की मांग प्रमाणित होने पर एफआईआर दर्ज की गई ।
’50 हजार से शुरू हुई मांग, 30 हजार पर तय हुआ सौदा’
ग्राम शहदाद का पार में कार्यरत एएनएम सुनीता का सितंबर से दिसंबर 2024 और मार्च 2025 का वेतन अटका हुआ था । जब उसने बीसीएमओ कार्यालय गडरा रोड का अतिरिक्त प्रभार संभाल रहे कनिष्ठ सहायक गजेन्द्र सिंह से संपर्क किया, तो आरोपी ने वेतन बनाने के बदले शुरुआत में 50 हजार रुपये की रिश्वत मांगी । एएनएम के मिन्नतें करने पर आरोपी 30 हजार रुपये लेकर काम करने को राजी हुआ । एएनएम ने 25 जुलाई 2025 को बाड़मेर एसीबी को इस पूरे मामले की शिकायत दी ।
‘कार्यालय नहीं पहुंचा आरोपी, लौटानी पड़ी रिश्वत की रकम’
एसीबी बाड़मेर ने 29 जुलाई 2025 को परिवादिया को वॉयस रिकॉर्डर देकर भेजा और रिश्वत मांगने की पुष्टि की । रिकॉर्डिंग में स्पष्ट हुआ कि गजेन्द्र सिंह 30 हजार रुपये लेने पर सहमत हुआ । इसके बाद 1 अगस्त 2025 को ट्रैप की योजना बनी । शिकायतकर्ता 30 हजार रुपये लेकर मौके पर पहुंची । आरोपी गजेन्द्र सिंह उस दिन गडरा रोड स्थित कार्यालय नहीं आया और अपने मूल पदस्थापन शिव कार्यालय में ही रहा ।
कुछ दिनों बाद अगस्त 2025 में विभाग ने गजेन्द्र सिंह को गडरा रोड के अतिरिक्त कार्यभार से मुक्त किया । इससे ट्रैप की कार्रवाई पूरी नहीं हो पाई । इसके बाद एसीबी ने शिकायतकर्ता की जमा कराई रिश्वत की राशि 13 नवंबर 2025 को उसे वापस लौटा दी । इस पूरी प्रक्रिया के बाद, वॉयस रिकॉर्डिंग में रिश्वत की मांग प्रमाणित होने पर 6 मार्च 2026 को आरोपी गजेन्द्र सिंह के खिलाफ धारा 7 भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज हुआ । मामले की अग्रिम जांच एसीबी बालोतरा के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कैलाश दान को सौंपी गई ।
