जयपुर: घड़ी के डिब्बों में पैक कर विदेश भेजे ‘नपुंसकता’ के अवैध इंजेक्शन, नामी हॉस्पिटल का डॉक्टर और असिस्टेंट रडार पर

नपुंसकता के इलाज के दावों के नाम पर अवैध इंजेक्शन का काला कारोबार जयपुर से ऑपरेट हो रहा था। जयपुर के एक बड़े प्राइवेट हॉस्पिटल के डॉक्टर का असिस्टेंट इस पूरे खेल का मास्टरमाइंड बताया जा रहा है। आरोप है कि डॉक्टर से फॉर्मूला सीखकर उसने ये अवैध इंजेक्शन तैयार किए और इसे विदेशों में अलार्म घड़ी के डिब्बों में पैक करके सप्लाई कर रहा था।

DCGI से अप्रूव नहीं है ‘TRIMIX’ इंजेक्शन

भास्कर पड़ताल और ड्रग्स विभाग की जांच में सामने आया कि TRIMIX नाम का ऐसा कोई भी इंजेक्शन ड्रग्स कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) से अप्रूव्ड नहीं है। भारत में किसी भी दवा को बेचने से पहले इसका अप्रूवल अनिवार्य है, लेकिन इस जानलेवा खेल में नियमों को ताक पर रख दिया गया।

सूरत से जयपुर तक ऐसे पहुँचा जांच का सिरा

इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब गुजरात ड्रग्स विभाग की टीम सूरत में ‘क्यूरीमेड लाइफ साइंसेज’ (Curimed Life Sciences) में रूटीन इंस्पेक्शन के लिए पहुँची। वहां टीम को TRIMIX नाम के इंजेक्शन के बारे में पता चला। जांच में पाया गया कि इस इंजेक्शन का बिल ‘Oh man’ फार्मेसी नाम से कटा था, जिस पर रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर जयपुर के डॉ. चिराग भंडारी का था।

डीसीजीआई के निर्देश पर राजस्थान ड्रग्स विभाग ने जब जांच की, तो पता चला कि ‘Oh Man’ नाम से किसी भी फार्मेसी को लाइसेंस जारी नहीं किया गया है। यह नाम एक वेबसाइट का मिला, जिसका संबंध भंडारी अस्पताल में स्थित जयभवानी फार्मेसी से पाया गया।

असिस्टेंट ने डॉक्टर से सीखकर बनाया ‘मौत का कॉकटेल’

ड्रग्स कंट्रोलर अजय फाटक के अनुसार, डॉ. चिराग भंडारी ने बताया कि मनीष सोनी पिछले पांच साल से उनके यहां असिस्टेंट था। वह डॉक्टर के प्रिस्क्रिप्शन वाली मेडिसिन कोरियर से भेजता था। मनीष को पता था कि TRIMIX इंजेक्शन में किन तीन दवाओं को किस अनुपात (रेशों) में मिलाना है। मनीष ने इसी जानकारी का फायदा उठाकर बिना किसी अनुमति के ये इंजेक्शन बनाए और ‘Oh Man’ प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर इन्हें बेचा।

विदेशी मरीजों से 1600 डॉलर तक की वसूली

यह अवैध इंजेक्शन केवल जयपुर तक सीमित नहीं था। इसकी सप्लाई युगांडा, सऊदी अरब, कोरिया समेत कई देशों में की गई। भारत में गुवाहाटी के मेडिकल कॉलेज, असम के इंस्टीट्यूट ऑफ यूरोलॉजी, नागपुर, सूरत, अहमदाबाद और हरियाणा तक यह अवैध माल भेजा गया। विदेशी मरीजों से एक इंजेक्शन के 800 से 1600 डॉलर (करीब 60 हजार से 1.30 लाख रुपये) तक वसूले गए।

घड़ी के डिब्बों में तस्करी और 90 लाख की धोखाधड़ी

भंडारी अस्पताल के एमडी डॉ. कांतिमल भंडारी ने बताया कि असिस्टेंट मनीष सोनी ने करीब 400-500 मरीजों से सीधे अपने अकाउंट में पैसे मंगवाए और करीब 80-90 लाख रुपए की धोखाधड़ी की। मनीष पकड़े जाने के डर से इंजेक्शन की सप्लाई अनोखे तरीकों से करता था। एक बार उसने अलार्म घड़ी के डिब्बों में पैक करके दवा मरीज को भेजी थी। अस्पताल प्रशासन ने 2 अप्रैल को ही मनीष के खिलाफ साइबर थाने में एफआईआर दर्ज करवा दी थी।

डॉ. चिराग भंडारी का पुराना विवाद

जांच में यह भी सामने आया कि डॉ. चिराग भंडारी का विवादों से पुराना नाता है। 7 साल पहले एसीबी (ACB) ने उन्हें 30 हजार रुपए की रिश्वत लेते हुए ट्रैप किया था। वह रिश्वत वेदांत इंजीनियरिंग कॉलेज में स्कॉलरशिप का फॉर्म आगे बढ़ाने के लिए मांगी गई थी। हालांकि, अस्पताल प्रशासन का कहना है कि वह केस अब खत्म हो चुका है।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

हॉस्पिटल एडमिनिस्ट्रेशन का कहना है कि— “ट्राइमिक्स” नामक कोई भी इंजेक्शन अस्पताल में आधिकारिक रूप से उपयोग में नहीं लिया जाता। यहां केवल निर्धारित प्रोटोकॉल से ही इलाज होता है। ऑनलाइन दवाई की बिक्री से अस्पताल का कोई लेना-देना नहीं है।

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