भ्रष्टाचार में राजस्थान ACB का कड़ा प्रहार: DG गोविन्द गुप्ता और उनकी टीम ने तोड़ी माफियाओं की कमर

राजस्थान भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) वर्तमान में प्रदेश में शुचिता और पारदर्शिता की नई इबारत लिख रहा है। डीजी गोविन्द गुप्ता के कुशल नेतृत्व और एडीजी स्मिता श्रीवास्तव के सटीक रणनीतिक कौशल ने ब्यूरो को एक ऐसी मारक इकाई में बदल दिया है, जिससे भ्रष्टाचारियों के हौसले पस्त हैं। इस अभियान को धरातल पर उतारने में आईजी एस. परिमाला जैसी अनुभवी अधिकारी और डीआईजी मुख्यालय रामेश्वर सिंह का प्रशासनिक समन्वय एक मजबूत स्तंभ बनकर उभरा।

कानून से बड़ा कोई नहीं: ACB की प्रतिबद्धता

एसीबी की इस टीम ने हाल के समय में कुछ ऐसे साहसिक कदम उठाए हैं, जिन्होंने यह स्पष्ट कर दिया है कि कानून की नजर में कोई भी व्यक्ति पद या प्रभाव के आधार पर बड़ा नहीं है। ब्यूरो की इस निर्भीकता ने शासन और प्रशासन के गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

जल जीवन मिशन में बड़ी कार्रवाई

राजस्थान की महत्वाकांक्षी ‘जल जीवन मिशन’ योजना में व्याप्त भ्रष्टाचार के खेल को उजागर कर एसीबी ने प्रदेशव्यापी हलचल पैदा कर दी है। विभाग के उच्चाधिकारियों और ठेकेदारों के गठजोड़ को तोड़ते हुए की गई गिरफ्तारियों ने यह साबित किया है कि जनता के हक के पैसे को डकारने वालों के लिए अब जेल की सलाखें ही ठिकाना हैं। इस कार्रवाई ने यह संदेश दिया है कि जनहित की योजनाओं में लूटपाट बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

प्रभावशाली चेहरों पर शिकंजा

ब्यूरो की निष्पक्षता का सबसे बड़ा उदाहरण वरिष्ठ अधिकारी सुबोध अग्रवाल जैसे रसूखदार व्यक्तियों के खिलाफ शुरू की गई जांच और कार्रवाई। हालांकि, सुबोध अग्रवाल फिलहाल पकड़ से दूर हैं, लेकिन उनके जैसे प्रभावशाली व्यक्तित्व के विरुद्ध मोर्चा खोलना ब्यूरो की निर्भीकता और कार्यक्षमता को दर्शाता है।

सातवें आसमान पर टीमों का मनोबल

किसी बड़े और शक्तिशाली व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई करने से न केवल जनता में विश्वास जगा है, बल्कि फील्ड में काम कर रही एसीबी की अन्य टीमों का मनोबल भी सातवें आसमान पर है। इससे यह स्पष्ट संदेश गया है कि यदि साक्ष्य पुख्ता हैं, तो ब्यूरो किसी भी अपराधी तक पहुँचने में नहीं हिचकिचाएगा।

नारा नहीं, हकीकत बना ‘जीरो टॉलरेंस’

महानिदेशक गोविन्द गुप्ता और उनकी कोर टीम—जिसमें स्मिता श्रीवास्तव, एस. परिमाला और रामेश्वर सिंह शामिल हैं—ने यह सुनिश्चित किया है कि ‘जीरो टॉलरेंस’ केवल एक सरकारी नारा बनकर न रहे। आज राजस्थान एसीबी का हर ऑपरेशन न केवल सफल हो रहा है, बल्कि वह भ्रष्टाचार की जड़ों पर सीधा प्रहार कर रहा है। प्रदेश की जनता अब आशा भरी नजरों से इस टीम की ओर देख रही है, जो वास्तव में ‘भ्रष्टाचार मुक्त राजस्थान’ के सपने को सच करने की दिशा में अग्रसर है।

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