राजस्थान में हॉकी के संचालन और प्रतिनिधित्व को लेकर चल रहा विवाद अब स्पष्ट हो गया है। हॉकी राजस्थान ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर यह साफ किया है कि माननीय जोधपुर उच्च न्यायालय के संशोधित आदेश के अनुसार ‘हॉकी राजस्थान’ ही राज्य की एकमात्र वैध और मान्यता प्राप्त संस्था है ।
हाई कोर्ट के आदेश में संशोधन और विवाद की स्थिति
विज्ञप्ति के अनुसार, 29 मार्च को अजमेर में ‘राजस्थान हॉकी एसोसिएशन’ के अध्यक्ष राजकुमार जयपाल ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी । इसमें उन्होंने जोधपुर उच्च न्यायालय के एक पुराने आदेश का हवाला देते हुए दावा किया था कि उनकी संस्था ही राज्य की टीम को राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में भेजने के लिए अधिकृत है ।
हालाँकि, स्थिति तब बदली जब 1 अप्रैल को माननीय उच्च न्यायालय, जोधपुर ने अपने 24 मार्च के आदेश में संशोधन (परिवर्तन) कर दिया । संशोधित आदेश में स्पष्ट किया गया है कि राजस्थान हॉकी एसोसिएशन एक विवादित संस्था है और यह वर्तमान में राजस्थान सरकार से विधिवत पंजीकृत नहीं है । इस आधार पर, यह संस्था राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने के लिए किसी भी टीम को भेजने हेतु अधिकृत नहीं है ।
हॉकी इंडिया ने वापस लौटाईं टीमें
इस विवाद का असर खिलाड़ियों पर भी देखने को मिला। 29 मार्च को राजस्थान हॉकी एसोसिएशन द्वारा अजमेर से भेजी गई सब-जूनियर (बालक एवं बालिका) टीमों को हॉकी इंडिया ने राष्ट्रीय प्रतियोगिता से वापस लौटा दिया है । हॉकी इंडिया ने आधिकारिक तौर पर स्पष्ट किया है कि राजस्थान हॉकी एसोसिएशन एक विवादित इकाई है, जबकि ‘हॉकी राजस्थान’ ही उनकी एकमात्र मान्यता प्राप्त इकाई है ।
2010 से ‘हॉकी राजस्थान’ ही अधिकृत
हॉकी राजस्थान को राजस्थान राज्य ओलंपिक संघ और हॉकी इंडिया की मान्यता प्राप्त है । वर्ष 2010 से केवल हॉकी राजस्थान द्वारा भेजी गई टीमों को ही राष्ट्रीय स्तर पर राजस्थान का प्रतिनिधित्व करने के लिए पात्र माना गया है । संस्था के अध्यक्ष अरुण सारस्वत और महासचिव मित्रानंद पूनिया ने पुष्टि की है कि राजस्थान में हॉकी की खेल गतिविधियों के लिए केवल उनकी संस्था ही वैधानिक रूप से उत्तरदायी है ।
