जलदाय विभाग अधिकारियों की कंपनियों पर 1000 करोड़ की मेहरबानी!

जलदाय विभाग अधिकारियों की कंपनियों पर 1000 करोड़ की मेहरबानी!

02 मई, 2022 स्पेशल स्टोरी जलदाय विभाग अधिकारियों की कंपनियों पर 1000 करोड़ की मेहरबानी! 100-50 करोड़ के लिए केन्द्र के आगे हाथ फैलाने वाला जलदाय विभाग…………..बड़ी कंपनियों से नहीं कर रहा वसूली – डेढ़ दर्जन कंपनियों पर पैनल्टी के साथ रिस्क एण्ड कास्ट की राशि है बकाया – अधिकारियों की लापरवाही व अनदेखी के

02 मई, 2022
स्पेशल स्टोरी

जलदाय विभाग अधिकारियों की कंपनियों पर 1000 करोड़ की मेहरबानी!
100-50 करोड़ के लिए केन्द्र के आगे हाथ फैलाने वाला जलदाय विभाग…………..बड़ी कंपनियों से नहीं कर रहा वसूली

– डेढ़ दर्जन कंपनियों पर पैनल्टी के साथ रिस्क एण्ड कास्ट की राशि है बकाया
– अधिकारियों की लापरवाही व अनदेखी के चलते वसूली में हो रही है देरी
– इंजीनियर्स की मिलीभगत का फायदा उठाकर ठेका कंपनियां पहुंची कोर्ट में
– कोर्ट स्टे के चलते आधा दर्जन कंपनियों से वसूली अटकी
– जलदाय विभाग अधिकारियों ने ही कंपनियों को बचाने के लिए दिखाया कोर्ट का रास्ता
– सेवानिवृत्ति के बाद अधिकांश इंजीनियर्स ने इन्हीं कंपनियों में संभाल ली बड़ी जिम्मेदारी
– अकेले मैसर्स प्रतिभा इण्डस्ट्रीज मुंबई पर 260 करोड़ से ज्यादा की राशि है बकाया
– मैसर्स एसपीएमएल कंपनी पर 135 करोड़ से ज्यादा की राशि बकाया
– मैसर्स एस्सार प्रोजेक्ट्स कंपनी से 115 करोड़ से ज्यादा की वसूली अटकी
– मैसर्स आईवीआरसीएल कंपनी पर 110 करोड़ की राशि बकाया
– बकाया राशि से विभाग को मिल सकता है हर महिने 10 करोड़ का ब्याज
– लेकिन इंजीनियर्स की लापरवाही के चलते राज्य सरकार हो रहा है नुकसान

जयपुर। राज्य सरकार प्रदेश में 100-50 करोड़ की पेयजल योजनाओं के लिए एक ओर जहां केन्द्र सरकार के साथ-साथ जायका, वल्र्ड बैंक और नाबार्ड के आगे हाथ फैला रही है, वहीं दूसरी ओर जलदाय विभाग केअधिकारी और इंजीनियर्स ठेका कंपनियों पर 1000 करोड़ की दरियादिली दिखा रहे हैं। विभाग के अधिकारियों और इंजीनियर्स की मिलीभगत के चलते वर्षों से ठेका कंपनियों पर लगाई गई पैनल्टी और रिस्क एण्ड कास्टकी इस राशि की वसूली नहीं की गई है। विभाग के अधिकारियों और इंजीनियर्स की बड़ी कंपनियों पर इस कदर मेहरबानी चल रही है कि बकाया राशि की वसूली करना तो दूर, बल्कि खुद कपंनियों को बचाने और पैनल्टी की वसूली ंको रोकने के लिए उन्हें कोर्ट का रास्ता बता रहे हैं। कोर्ट स्टे मिलने के बाद विभाग के अधिकारी करोड़ों की वसूली को भूल जाते हैं और ठेका कंपनियां विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत और कमजोर पैरवी की आड़ लेकर करोड़ों की वसूली से बच रही है। पिछले 15 सालों में ठेका कंपनियों से 1000 करोड़ की वसूली नहीं हो सकी है। ठेका कंपनियों पर बकाया राशि का आंकड़ा हर साल बढ़ता ही जा रहा है। विभाग के अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से बचने के लिए ठेका कंपनियों के साथ अपने अधीनस्थ को नोटिस तो जारी करते हैं, लेकिन बकाया राशि की वसूली को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाने से से ये नोटिस महज खानापूर्ति बनकर रह जाते हैं। विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत के चलते कई कंपनियों से पिछले कई वर्षों से बकाया राशि की वसूली नहीं हो सकी है। जलदाय विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और इंजीनियर्स की मिलीभगत के चलते मैसर्स एस्सार, मैसर्स एसपीएमएल, मैसर्स आईवीआरसीएल, मैसर्स केएसएस पेट्रोन जैसी कई कंपनियां कोर्ट में पहुंच गई और विभाग की कमजोर पैरवी और मिलीभगत के चलते अपने पक्ष में निर्णय करवा लिए और कई मामलों में स्टे लेकर विभाग की वसूली की प्रक्रिया को अटका दिया। प्रदेशभर में ठेका कंपनियों पर जलदाय विभाग के करीब 1000 करोड़ रूपए बकाया है, जिसकी वसूली नहीं हो पा रही है। बकाया राशि से विभाग को हर महिने करीब 10 करोड़ का ब्याज मिल सकता है। दूसरी ओर बकाया राशि की वसूली हो जाए तो प्रदेश की अधूरी परियोजनाओं को आसानी से पूरा किया जा सकता है, लेकिन विभाग के अधिकारियों की लापरवाही और मिलीभगत के चलते एक ओर से जहां राज्य सरकार का मोटा पैसा कंपनियों में अटका गया, वहीं दूसरी ओर बजट के अभाव मंे पेयजल योजनाओं के कार्यों में देरी के चलते आमजन को पेयजल किल्लत से जूझना पड़ रहा है।

अधिकारी रहते हुए कंपनियों पर करोड़ों की मेहरबानी, सेवानिवृत्ति के बाद इन्हीं कंपनियों की संभाली जिम्मेदारी

जलदाय विभाग में अधीक्षण अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता स्तर के अधिकारी जलदाय विभाग में रहते हुए पहले बड़ी ठेका कंपनियों में करोड़ों की मेहरबानी करते रहते हैं और सेवानिवृत्त होने के बाद इन्हीं कंपनियों में बड़े पदों की जिम्मेदारी संभाल लेते हैं। जलदाय विभाग में पिछले एक दशक में 25 से ज्यादा ऐसे इंजीनियर हैं, जो आज एसपीएमएल, जीवीपीआएल, एलएण्डटी सहित अन्य कंपनियों के लिए काम कर रहे हैं। इन अधिकारियों को विभाग की सभी पालिसियों के साथ ही कार्यों में गलियां निकालकर मोटा फायदा कमाने की पूरी जानकारी है। इनमें से कई अधिकारी तो ऐसे हैं, जो वाटर प्रोजेक्ट्स की डीपीआर से लेकर टेंडर डाॅक्यूमेंट्स तक का खाका इस तरह तैयार करके लाते हैं, जिनसे जनता की प्यास कम बुझती है और कंपनियों की मोटी कमाई होती है। विभाग में आज मुख्य अभियंता और अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं की कुर्सी पर बैठे ये अधिकारी कभी कंपनियों में बड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे इन पूर्व इंजीनियर्स के अधीन काम करते थे, इसलिए वे इनके दबाव में भी काम करते हैं। ऐसे में प्रदेश की जनता की प्यास की चिंता से ज्यादा इन अधिकारियों को कपंनियों के साथ खुद के फायदे की चिंता ज्यादा रहती है। दूसरी ओर विभाग के ये अधिकारियों इन बड़ी कंपनियों पर कार्रवाई करने से भी कतराते हैं।

बाॅक्स-

– पेयजल परियोजनाओं में देरी के चलते पैनल्टी और रिसाइंड कार्यों के चलते ठेका कंपनियों पर रिस्क एण्ड कास्ट की बकाया राशि

प्रोजेक्ट का नाम कंपनी का नाम बकाया राशि

चंबल-धौलपुर-भरतपुर प्रोजेक्ट पार्ट-1 मै. एस्सार प्रोजेक्ट्स लि. 115.39 करोड़
भरतपुर-कुम्हेर-डीग-नगर-कामां-पहाड़ी प्रोजेक्ट मै. आईवीआरसीएल लि. 78.07 करोड़
माकोलाव-दांतीवाड़ा-पीपाड़-बिलाड़ा प्रोजेक्ट पैकेज-1 मै. डीएससी लि. 9.53 करोड़
पोकरण-फलसूण्ड-सिवाना-बालोतरा प्रोजेक्ट एसपीआर-2ए मै. एसपीएमएल लि. 60.41 करोड़
पोकरण-फलसूण्ड-सिवाना-बालोतरा प्रोजेक्ट एसपीआर-3बी मै. आईवीआरसीएल लि. 20.40 करोड़
बीएलडब्ल्यूएसपी प्रोजेक्ट फेज-2 पार्ट-ए मै. प्रतिभा इण्डस्ट्रीज लि. 14.23 करोड़
चंबल-भीलवाड़ा प्रोजेक्ट फेज-2 पैकेज-3 मै. प्रतिभा इण्डस्ट्रीज लि. 30.91 करोड़
चंबल-भीलवाड़ा प्रोजेक्ट फेज-2 पैकेज-4 मै. प्रतिभा इण्डस्ट्रीज लि. 87.62 करोड़
सीबीडब्ल्यूएसपी जहाजपुर-कोटड़ी प्रोजेक्ट मै. प्रतिभा इण्डस्ट्रीज लि. 20.62 करोड़
सीबीडब्ल्यूएसपी फेज-2 पैकेज-8 मै. प्रतिभा इण्डस्ट्रीज लि. 70.55 करोड़
ब्यावर-जवाजा कलस्टर प्रोजेक्ट मै. एसपीएमएल लि. 20.72 करोड़
नागौर प्रोजेक्ट फेज-1 पैकेज-4 मै. केएसएस पेट्रोन लि. 39.73 करोड़
शायगढ़ वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट मै. श्रीराम ईपीसी लि. 20.52 करोड़

 

केस-1

चंबल-धौलपुर-भरतपुर पार्ट-1 प्रोजेक्ट में एस्सार प्रोजेक्ट्स पर 115.39 करोड़ बकायामैसर्स एस्सार प्रोजेक्ट्स लिमिटेड कंपनी को 5 दिसम्बर, 2002 में सागरपाड़ा धौलपुर से मल्लाह भरतपुर तक मुख्य ट्रांसमिशन पाइपलाइन चंबल-धौलपुर-भरतपुर पार्ट-1 प्रोजेक्ट का 137 करोड़ का वर्क आर्डर जारी किया गया था। कंपनी की ओर से कार्य पूरा नहीं करने पर विभाग की ओर से 30 मई, 2005 को प्रोजेक्ट का कार्य रिसाइंड कर दिया गया था। रिसाइंड प्रोजेक्ट के बाकी कार्य का वर्क आर्डर 5 अक्टूबर, 2007 को मैसर्स आईवीआरसीएल को 213.76 करोड़ का जारी किया गया। कार्य में देरी को लेकर एस्सार प्रोजेक्ट्स लिमिटेड पर 13.70 करोड़ की पैनल्टी और रिस्क एण्ड कास्ट की 105.76 करोड़ की राशि की बकाया राशि की वसूली निकाली गई। जलदाय विभाग के अधिकारी कंपनी से मात्र 4.07 करोड़ की बकाया राशि की वसूली कर पाए। कंपनी पर जलदाय विभाग के 115 करोड़ 39 लाख रूपए बकाया है, जिनकी विभाग के अधिकारी आज तक वसूली नहीं कर पाए। दूसरी ओर कंपनी मामले को लेकर हाईकोर्ट में चली गई, जहां हाईकोर्ट ने 19 जुलाई, 2017 को कंपनी पर लगाई 13.70 करोड़ की पैनल्टी की राशि को निरस्त करने का निर्णय दे दिया। हालांकि विभाग की ओर से मामले में 17 मई, 2018 को सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर की थी, जिसकी सुनवाई हुई थी लेकिन अभी तक मामले में कोई निर्णय नहीं हो पाया है।

केस-2

कुम्हेर-डीग-नगर-कामां-पहाड़ी प्रोजेक्ट में आईवीआरसीएल पर 78.07 करोड़ बकायामैसर्स आईवीआरसीएल लिमिटेड कंपनी को 13 सितम्बर, 2012 में मल्लाह भतरपुर से कुम्हेर-डीग-नगर-कामां-पहाड़ी मुख्य ट्रांसमिशन पाइपलाइन और डीग के 97 गांवों की पेयजल सप्लाई योजना का वर्क आर्डर जारीकिया गया था। कंपनी की ओर से कार्य में देरी के चलते 22 सितम्बर, 2014 को वर्क रिसाइंड कर दिया गया था। रिसाइंड प्रोजेक्ट के बाकी कार्य का वर्क आर्डर 29 जनवरी, 2016 को मैसर्स एसपीएमएल कंपनी को 262.62 करोड़ का जारी किया गया। मैसर्स आईवीआरसीएल कंपनी पर पैनल्टी के 20.28 करोड और रिस्क एण्ड कास्ट की 70.41 करोड़ रूपए की राशि बकाया निकली, जिसमें से विभाग केवल 12.62 करोड़ की पैनल्टी की वसूली ही कर पाया है। विभाग के निर्णय के खिलाफ मैसर्स आईवीआरसीएल कंपनी 16 अगस्त, 2017 को हाईकोर्ट में चली गई। कोर्ट के निर्णय के चलते अभी तक वसूली अटकी पड़ी है।

केस-3

चंबल-भीलवाड़ा प्रोजेक्ट फेज-2 के गंगापुर कलस्टर में प्रतिभा इण्डस्ट्रीज पर 87.62 करोड़ बकायामैसर्स प्रतिभा इण्डस्ट्रीज लिमिटेड कंपनी को 29 अगस्त, 2013 को चंबल-भीलवाड़ा वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट फेज-2 के पैकेजे-4 गंगापुर कलस्टर का 418.36 करोड़ रूपए का वर्क आर्डर जारी किया गया था। कंपनी की ओरसे कार्य में देरी के चलते 19 सितम्बर, 2016 को वर्क रिसाइंड कर दिया गया। कार्य में देरी को लेकर कंपनी पर 41.83 करोड़ की पैनल्टी और रिस्क एण्ड कास्ट की 56.65 करोड़ रूपए की राशि बकाया निकली। जलदाय विभाग की ओर से कंपनी से अब तक 10.63 करोड़ रूपए की पैनल्टी की राशि की वसूली की गई है। शेष राशि की वसूली के लिए विभाग के अधिकारियों ने सभी मुख्य अभियंता और अतिरिक्त मुख्य अभियंताओं को उनके क्षेत्रों में चल रहे कार्यों से वसूली के लिए पत्र लिखे हैं, लेकिन कंपनी के पास पर्याप्त कार्य नहीं होने के कारण मैसर्स प्रतिभा इण्डस्ट्रीज कंपनी से बकाया राशि की वसूली अटकी पड़ी है।

केस-4

पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा प्रोजेक्ट में एसपीएमएल 60.41 करोड़ बकायामैसर्स एसपीएमएल लिमिटेड कंपनी को 14 सितम्बर, 2012 को पोकरण-फलसूण्ड-बालोतरा-सिवाणा वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट पैकेज-एसपीआर 2ए का 230.98 करोड़ का वर्क आर्डर जारी किया गया था। कंपनी की ओर से कार्य में की जा रही देरी को लेकर 29 दिसम्बर, 2016 को वर्क रिसाइंड कर दिया गया। कार्य में देरी को लेकर मैसर्स एसपीएमएल कंपनी पर 12.58 करोड़ रूपए पैनल्टी और रिस्क एण्ड कास्ट की 66.23 करोड़ रूपए की राशि बकाया निकाली गई। जलदाय विभाग की ओर से कंपनी से 18.60 करोड़ रूपए की वसूली की गई। एसपीएमएल कंपनी की ओर से हाईकोर्ट में केस दायर करने के बाद 24 मई, 2018 को हाईकोर्ट से बकाया राशि की वसूली पर स्टे दे दिया, जिसके चलते कंपनी से वसूली की अटक गई।

– ठेका कंपनियों पर बकाया राशि

ठेका कंपनी का नाम बकाया राशि

मैसर्स एस्सार प्रोजेक्ट्स लिमिटेड 115.39 करोड़
मैसर्स प्रतिभा इण्डस्ट्रीज लिमिटेड 255.65 करोड़
मैसर्स एसपीएमएल इन्फ्रा लिमिटेड 134.46 करोड़
मैसर्स आईवीआरसीएल लिमिटेड 110.05 करोड़
मैसर्स केएसएस पेट्रोन लिमिटेड 39.63 करोड़
मैसर्स श्रीराम ईपीसी लिमिटेड़ 20.52 करोड़
मैसर्स डीएससी लिमिटेड 9.53 करोड़

Posts Carousel

Leave a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked with *

Latest Posts

Main Authors

Most Commented

Featured Videos

Categories