बाघा बलास्ट मामले में 3 आतंकियों को फांसी और 300 साल की सजा

2014 में हुए आत्मघाती हमले में बच्चों और महिलाओं समेत 60 लोगों की हुई थी मौत

लाहौर : पाकिस्तान की एक एंटी-टेररिज्म कोर्ट ने बुधवार को तीन आतंकियों को मौत की सजा सुनाई है। ये तीनों आतंकी एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन के सदस्य हैं। अदालत ने इन तीनों आतंकियों हसीबुल्लाह, सईद जन घना और हुसैनुल्लाह को दोषी ठहराते हुए मौत की सजा के साथ-साथ 300 साल कैद की सजा सुनाई है और हरेक पर दस-दस लाख रुपये का जुर्माना भी किया है। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2014 में भारत-पाक बार्डर स्थित अटारी से लगे हुए लाहौर के बाघा बार्डर पर एक बलास्ट हुआ था, जिसमें बच्चों और महिलाओं समेत 60 लोगों की मौत हो गई थी। इस आत्मघाती हमले की जिम्मेदारी प्रतिबंधित संगठन जुंडुल्ला और तहरीक-ए-तालिबान ने अलग-अलग ली थी। इन संगठनों के सदस्य हसीबुल्लाह, सईद जन घना और हुसैनुल्लाह को कोर्ट में पेश किया गया। अदालत ने इन्हें कुल पांच मामलों में दोषी पाया और 300 साल तक कैद की सजा सुनाई है। जबकि बलास्ट मामले के तीन अन्य संदिग्धों को संदेह का लाभ देते हुए अदालत ने बरी कर दिया है।

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